राजस्थान की हस्तकला: टेस्ट-3 September 23, 2026 राजस्थान की हस्तकला: टेस्ट-3 1 / 30 राजस्थान की कौनसी पारम्परिक कपड़ा रंगाई तकनीक से लम्बे समय तक सुगंधित रहने वाले कपड़े/वस्त्र का उत्पादन किया जाता था? सांख्यिकी अधिकारी 2021 अमोवा मलयगिरि पोमचा सांगानेरी 2 / 30 राजस्थान का कौनसा जिला बंधेज साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है? EO/RO Ex. 2023 जोधपुर कोटा शाहपुरा उदयपुर बंधेज प्रिंट- वस्त्रों पर छपाई की एक तकनीक जिसमें कपड़ों को जगह-जगह पर धागे से बांधकर, रंग में डुबोकर अलंकरण बनाया जाता है। बंधेज की छपाई लहरिया, मोठड़ा, चुनरी, धनक, पोमचा आदि रूपों में होती है। प्रमुख केन्द्र- जयपुर, जोधपुर, बगरू, सुजानगढ़, कालाडेरा आदि। लहरिया- रंगाई के दौरान कपड़े को एक सिरे से दूसरे सिरे तक बाँधने से धारियाँ बन जाती हैं। यह बंधेज लहरिया कहलाता है। 3 / 30 निम्नलिखित में से कौनसा राजस्थान की प्रसिद्ध हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक का नाम है, जिसमें सफेद या ऑफ-व्हाइट पृष्ठभूमि पर दबाए गए जटिल पुष्प पैटर्न्स होते हैं? टाउन प्लानर Ex. 2023 बांधनी सांगानेर लहरिया पटोला 4 / 30 बीकानेर के 'लहरिये व मोण्डे' प्रसिद्ध हैं, तो सांगानेर के- पटवार परीक्षा 2011 अजरक प्रिंट सांगानेरी प्रिंट जाजम कशीदाकारी सांगानेरी प्रिंट लट्ठा या मलमल पर विभिन्न डिजाइनों की छपाई की जाती है। सांगानेरी प्रिंट की छपाई के प्रमुख छापे मींडकी, अशर्फी, बैबून्दी, धनिया आदि हैं। इसमें लाल व काले रंग की प्रधानता होती है। सांगानेर में छपाई का कार्य करने वाले छीपे नामदेवी छीपे कहलाते हैं। सांगानेरी प्रिंट कला का सर्वाधिक विकास सवाई जयसिंह के काल में हुआ। 1803 ई. में सर जॉर्ज वाट ने अपनी पुस्तक 'इण्डियन आर्ट ऐट देहली' में इसका उल्लेख किया है। मुन्नालाल गोयल ने इसे विश्व प्रसिद्धि दिलाई। 5 / 30 गेहूँ के बींधण का प्रयोग दाबू के लिए कहाँ होता है? वनरक्षक परीक्षा 2013 बगरू सवाई माधोपुर टोंक बाड़मेर 6 / 30 'जाजम और अजरक' हस्तशिल्प कला की किस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं? सर्वेयर 2025 छपाई और रंगाई धातु का काम काँच का काम लाख की चूड़ियाँ 7 / 30 निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सुमेलित नहीं है? पटवारी परीक्षा 2021 SI Ex. 2018 थेवा कला - प्रतापगढ़ मीनाकारी - जयपुर अजरक प्रिंट - सांगानेर टेराकोटा शिल्प - मोलेला 8 / 30 बाड़मेर ब्लॉक मुद्रित कपड़े का एक और नाम क्या है?अथवाबाड़मेर प्रिंट अपने बोल्ड ज्यामितीय पैटर्न के लिए जाने जाते हैं, जिन्हें कहा जाता है- RPSC प्रवक्ता (तकनीकी शिक्षा विभाग) 2021 पटवार 2025 बादला अजरक फड़ पिछवाई 9 / 30 निम्नांकित में से कौनसा शासक है, जिसने गलीचा बनाने में पहल की? कृषि अधिकारी 2013 आमेर का मानसिंह प्रथम बीकानेर का रायसिंह मेवाड़ का राजसिंह जोधपुर का अजीतसिंह जयपुर गलीचों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। आमेर के शासक मानसिंह प्रथम ने गलीचा बनाने की पहल की। राजकीय संग्रहालय जयपुर में ईराक के शाह अब्बास द्वारा मिर्जा राजा जयसिंह को भेंट स्वरूप दिया गया गलीचा सुरक्षित है, जिसमें बगीचा बना हुआ है। बीकानेर जिले के गलीचों का कार्य सर्वाधिक सुंदर माना जाता है। 10 / 30 'बांधो और रंगो' कला के लिए राजस्थान में कौनसा स्थान प्रसिद्ध है? कनिष्ठ अभियंता (यांत्रिक/विद्युत) डिग्री 2020 जोधपुर नाथद्वारा बाड़मेर जयपुर 11 / 30 अजरक प्रिंट के लिए राजस्थान का कौनसा स्थान प्रसिद्ध है? Librarian (Gr.-III) 2025 CET (10+2) 2023 प्रयोगशाला सहायक (भूगोल) 2022 PTI 2022 सांगानेर बाड़मेर कोटा जैसलमेर अजरक प्रिंट [बाड़मेर]- इसमें लाल व नीले रंग से छपाई की जाती है। अलंकरण ज्यामितीय होते हैं तथा छपाई दोनों तरफ की जाती है। मलीर प्रिंट [बालोतरा]- इसमें एक तरफ की छपाई की जाती है। कत्थई व काले रंग का प्रयोग होता है तथा ज्यामितीय अलंकरणों की प्रधानता होती है। 12 / 30 वस्त्र रंगने की मलयगिरी पद्धति में किस रंग की प्रधानता होती है? IIGr. Tea. [संस्कृत] Ex. 2023 काला भूरा नीला पीला वस्त्र रंगने की मलयगिरी पद्धति में भूरे रंग को कई रंगों के मिश्रण के साथ चन्दन मिलाकर तैयार किया जाता है। इस रंग से रंगा वस्त्र लम्बे समय तक सुगंधित रहता है। 13 / 30 राजस्थान का कौनसा क्षेत्र बेलबूटों की छपाई की परम्परागत कला के लिए जाना जाता है? कनिष्ठ अभियंता (यांत्रिक/विद्युत) डिग्री 2020 RAS/RTS 2003 मोलेला बगरू सांगानेर बस्सी प्राचीन छपाई कला जिसमें लकड़ी के ठप्पों द्वारा फूल पत्तियों व पशु-पक्षियों का काले एवं लाल रंग से चित्रांकन किया जाता है। बगरू प्रिंट में बगरू की मिट्टी तथा वानस्पतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है। रामकिशोर छीपा को बगरू प्रिंट के लिए 2009 में पद्मश्री मिला है। 14 / 30 पोमचा क्या है? वनपाल 2022 चित्रकला शैली रंगाई की शैली पद्य शैली बर्तन गढ़ने की शैली बंधेज की रंगाई से बना हुआ वस्त्र जिसमें चारों ओर कोरा पल्ला तथा बीच में कमल के फूल के अभिप्राय युक्त ओढ़नी बनाई जाती है। नवजात शिशु की माँ के लिए पीहर पक्ष की ओर से पीला (पुत्र के जन्म पर) व गुलाबी (पुत्री के जन्म पर) पोमचा पहनाया जाता है। 15 / 30 राजस्थान राज्य बजट 2025-26 के अनुसार "ब्लॉक प्रिंटिंग जोन" की स्थापना कहाँ की जाएगी? 4th Gr. Ex. 2025 बगरू सीकर सांगानेर जोधपुर 16 / 30 अजरक प्रिंट में आमतौर पर किन रंगों का प्रयोग किया जाता है? प्रवक्ता (तकनीकी शिक्षा विभाग) 2021 गुलाबी और भूरा हरा और सफेद नीला और लाल काला और सफेद 17 / 30 दाबू प्रिंट के लिए कौनसा स्थान प्रसिद्ध है? CET (10+2) 2023 गाँव आकोला गाँव मोलेला प्रतापगढ़ हरजी गाँव दाबू प्रिंट- रंगाई छपाई में जिस स्थान पर रंग नहीं चढ़ाना होता है, उसे लेई या लुगदी से दबा देते हैं। यही लुगदी/लेई दाबू कहलाती है। आकोला की छपाई के घाघरे प्रसिद्ध हैं। सवाई माधोपुर में मोम का, बालोतरा में मिट्टी का, सांगानेर व बगरू में गेहूँ के बींधण का तथा आकोला (चित्तौड़गढ़) में मिट्टी व गोंद का दाबू लगाया जाता है। 18 / 30 निम्न में से कौनसा कथन राजस्थान की ब्लॉक छपाई के बारे में सही नहीं है? CET (10+2) 2023 इसकी प्रक्रिया की शुरुआत 12वीं सदी से हुई थी। इसमें प्राकृतिक रंगों का उपयोग नहीं किया जाता है। यह राजस्थान का एक प्राचीन शिल्प रूप है। इसे सूती कपड़े पर किया जाता है। 19 / 30 सुमेलित कीजिए- सूची-I(हस्तशिल्प) सूची-II(स्थान) A.अजरक प्रिन्ट (I)नाथद्वारा B.जाजम प्रिन्ट (II)चित्तौड़गढ़ C.पिछवाई (III)अकोला D.दाबू प्रिन्ट (IV)बाड़मेर नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए- V.D.O. मुख्य परीक्षा 2022 A-IV, B-II, C-I, D-III A-II, B-IV, C-I, D-III A-I, B-II, C-III, D-IV A-III, B-I, C-IV, D-II 20 / 30 राजस्थान में कमल पुष्प के छापे से बनी ओढ़नी को किस नाम से जाना जाता है? स्कूल व्याख्याता 2025 पोमचा पतंगा लहरिया चुनड़ी 21 / 30 मलीर प्रिंट का संबंध किससे है? द्वितीय श्रेणी शिक्षक [हिन्दी] 2011 बूँदी से सांगानेर से उदयपुर से बाड़मेर से 22 / 30 जीरोही, भाकला, गंदहा किस उद्योग के नाम हैं? पशुधन सहायक 2016 जटपट्टी पेचवर्क मीनाकारी ब्लू पॉटरी जट पट्टियाँ बकरी के बालों से बनी होती हैं। बालोतरा का जसोल बकरी के बालों से बनने वाली जटपट्टियों की बुनाई का केन्द्र है, जहाँ कुम्हारों के मारूगोत्र के लोग इस काम में लगे हुए हैं। जट पट्टी उद्योग को जीरोही, भाकला व गंदहा नाम से भी जाना जाता है। 23 / 30 कौनसा समुदाय पारंपरिक रूप से फड़ चित्रों से कथाएँ सुनाने से जुड़ा हुआ है? 4th Gr. Ex. 2025 REET Main's (Sanskrit) Ex. 2023 कालबेलिया लंगा मांगणियार भोपा 24 / 30 जाजम/आजम छपाई कहाँ की प्रसिद्ध है? कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 2021 वनरक्षक परीक्षा 2022 चित्तौड़गढ़ की बाड़मेर की जोधपुर की दौसा की मोटे सूती धागे की बुनाई कर बनाई जाने वाली मोटी दरी 'जाजम' कहलाती है। जाजम पर हाथ की छपाई की जाती है। इसमें लाल व हरे रंग का प्रयोग ज्यादा होता है। जाजम छपाई के लिए चित्तौड़गढ़ प्रसिद्ध है। 25 / 30 राजस्थान के संदर्भ में पचेवड़ा क्या है? सांख्यिकी अधिकारी 2021 कच्ची मिट्टी के खिलौने जूट पट्टी हस्तनिर्मित कागज मोटी सूती शॉल राजस्थान के संदर्भ में पछेवड़ा मोटी सूती शॉल या कंबल की तरह मोटा सूती वस्त्र होता है, जिसे ठंड के मौसम में ओढ़ा/पहना जाता है। 26 / 30 ................अपने काले-लाल प्रिंट के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें फूलों, पत्तियों, जानवरों और पक्षियों को मटिया (मिट्टी) रंग के आधार पर लाल और काले रंग में बनाया जाता है? AEN Ex. 2023 सांगानेरी कैथून बगरू अकोला 27 / 30 सुमेलित कीजिए- सूची-I सूची-II 1.अजरक प्रिंट (i)कैथून 2.पावरलूम कपड़ों पर छपाई (ii)जोधपुर 3.मोठड़ा (iii)बालोतरा 4.मसूरिया (iv)बाड़मेर नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए- CET (स्नातक स्तर) 2023 1-(i), 2-(ii), 3-(iii), 4-(iv) 1-(ii), 2-(iii), 3-(iv), 4-(i) 1-(iv), 2-(iii), 3-(ii), 4-(i) 1-(iii), 2-(iv), 3-(i), 4-(ii) कोटा डोरिया- सूती धागे के साथ रेशमी व जरी के काम को कोटा डोरिया कहा जाता है। झाला जालिम सिंह [कोटा] मैसूर से मंसूर अहमद बुनकर को कोटा लाये, इसलिए इसे मसूरिया साड़ी भी कहा जाता है। प्रसिद्ध केन्द्र- कैथून [कोटा], मांगरोल [जैनब व मसूरिया]। 28 / 30 कोटा डोरिया साड़ी का एक अन्य नाम है- 4th Gr. Ex. 2025 कोटा गोटा पट्टी साड़ी कोटा बनारस साड़ी कोटा कॉटन साड़ी कोटा मसूरिया साड़ी 29 / 30 निम्नलिखित में से कौनसा (हस्तशिल्प - स्थान) सुमेलित नहीं है? JEN यांत्रिकी-डिग्री 2022 दाबू प्रिन्ट - आकोला गांव (चित्तौड़गढ़) अजरक प्रिन्ट - बाड़मेर उस्ता कला - बीकानेर जट पट्टी - नागौर 30 / 30 निम्नलिखित में से कौनसा स्थान दरी निर्माण के केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है? LDC 2016 टोंक पुष्कर जयपुर उदयपुर राजस्थान में दरी निर्माण के प्रमुख केन्द्र- 1. टांकला ग्राम (नागौर), 2. सालावास (जोधपुर ग्रामीण) - सालावास के दस्तकार दरियों पर मांडणे, कोरणी, पशु-पक्षी और देवी-देवताओं के चित्रों की बुनाई से उकेरते हैं, 3. लवाण (दौसा), 4. लेटा गाँव (जालौर) - ओढ़ने की मोटी सूती चादर 'खेसला' के लिए प्रसिद्ध है, 5. मांगरोल (बाराँ)। दरी व कालीन का कार्य राजस्थान के जयपुर तथा अजमेर क्षेत्र में विशेष रूप से होता है। अगर लीडरबोर्ड (रिजल्ट) में आपका नाम चाहते हैं, तो निम्न जानकारी फिल कर सकते हैं। आपका केवल नाम सार्वजनिक होगा, ई-मेल और मोबाइल नंबर गोपनीय रहेगा। आप हर बार एक ही नाम और ईमेल का प्रयोग करें, ताकि हर बार अंक आपके स्कोरबोर्ड में ही काउंट हो। Your score isThe average score is 0% 0%