राजस्थान की हस्तकला: टेस्ट-4 September 23, 2026 राजस्थान की हस्तकला: टेस्ट-4 1 / 30 कौनसी संस्था कठपुतली कला के राजस्थान में संरक्षण-संवर्धन में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका के लिए जानी जाती है? सहायक कृषि अधिकारी 2018 इंडियन आर्ट पैलेस, दिल्ली शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इन्स्टीट्यूट, बीकानेर भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर राजस्थानी शोध संस्थान, जोधपुर राज्य में कठपुतली संग्रहालय- बागौर की हवेली, उदयपुर; भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर (1952 में स्थापित); शिल्पग्राम, उदयपुर। कठपुतली कला को प्रसिद्धि दिलाने वाले कलाकार - देवीलाल सामर। 2 / 30 लप्पा, लप्पी, किरण और गोखरू क्या हैं? कनिष्ठ अनुदेशक 2022 राजस्थानी फिल्म 'सासू माँ' में किरदार गोटा की विभिन्न किस्में शेरवानी के नाम अधिक उपज देने वाले कीट (किडनी, बीन फंजियोलस एक्रोनाइट फोलियस) की किस्में वस्त्रों पर गोटा लगाने के तरीके- गोखरू- गोटे को मोड़कर तिकोने डिजाइन में बनाया गया फूल; लप्पा- आँचल में लगाया गया चौड़ा गोटा; लप्पी- आँचल में लगाया गया कम चौड़ाई का गोटा; मुकेश- सूती या रेशमी कपड़े पर छोटी-छोटी बादले से बिंदकी की कढ़ाई; बिजिया- गोटे से बने फूल; चम्पाकली- गोटे से बनी बेल; लहर गोटा- खजूर की पत्तियों के आकार का गोटा; बांकली- तार बादले से बनी बेल जिसे दुपट्टों व पोशाकों पर लगाया जाता है; किरण- बादले की झालर जिसे नवविवाहिता की साड़ी के आँचल और घूँघट वाले हिस्से में लगाया जाता है। प्रमुख केन्द्र- खण्डेला [सीकर], भिनाय [अजमेर]। 3 / 30 लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए जोधपुर जिले के बोरूंदा में 'रूपायन संस्थान' की स्थापना किसने की? 4th Gr. Ex. 2025 CET (स्नातक) 2023 कोमल कोठारी विजयदान देथा गुलाब कोठारी (1) व (2) दोनों रूपायन संस्थान की स्थापना 1960 बोरूंदा (जोधपुर) में कोमल कोठारी और विजयदान देथा द्वारा लोक कथाओं और लोक गीतों को एकत्र करने के लिए की गई। 4 / 30 सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए- सूची-I सूची-II A.पाने (1)लकड़ी B.फड़ (2)दीवार तथा फर्श C.मांडना (3)कपड़ा D.कावड़ (4)कागज नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए- LDC Exam 2024 CET (10+2) 2024 A-1, B-2, C-3, D-4 A-3, B-4, C-2, D-1 A-4, B-3, C-2, D-1 A-2, B-3, C-4, D-1 मांडना- राजस्थान में विभिन्न मांगलिक अवसरों पर महिलाओं द्वारा गेरू, खड़िया व हिरमिच से अनामिका की सहायता से घर के आंगन व दीवारों को अलंकृत करने के लिए जो ज्यामितीय अलंकरण बनाए जाते हैं 'मांडने' कहलाते हैं। फड़ चित्रण- रेजी या खादी के कपड़े पर विभिन्न लोक-देवताओं तथा ऐतिहासिक व्यक्तियों के जीवन चरित्र व चमत्कारों का चित्रित स्वरूप ही फड़ कहलाता है। शाहपुरा फड़ चित्रण का प्रमुख केन्द्र है। फड़ चित्रण में लाल व हरे रंग का प्रमुख रूप से प्रयोग करते हैं। पाने- विभिन्न देवी-देवताओं के कागज पर बने चित्र पाने कहलाते हैं। श्रीनाथ जी का पाना सबसे अधिक कलात्मक है, जिसमें 24 शृंगारों का चित्रण है। 5 / 30 चाँदी के आभूषणों की तारकशी के लिए राजस्थान का कौनसा स्थान प्रसिद्ध है? वनपाल 2022 अध्यापक भर्ती (अंग्रेजी) 2023 प्रतापगढ़ जालौर खण्डेला नाथद्वारा चाँदी के तारों को गूँथकर बनाए गए आभूषण तारकशी के जेवर कहलाते हैं। तारकशी के जेवर नाथद्वारा व जयपुर के प्रसिद्ध हैं। 6 / 30 कावड़ कला के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही नहीं है? Asst. Pro. (History) 2024 यह ले जाने योग्य मंदिर नहीं है। प्रत्येक पैनल में एक चित्रित आख्यान है। बस्सी गाँव का सत्यनारायण सुथार इसका प्रसिद्ध चित्रकार है। कावड़ आम और सेमल के पेड़ की लकड़ी से बनाई जाती है। 7 / 30 'बेवाण' कला किससे सम्बन्धित है? अध्यापक भर्ती (अंग्रेजी) Ex. 2023 प्रस्तर मूर्ति कला से आँगन-चित्रण से मृण कला से काष्ठ कला से 8 / 30 'चंदूजी का गढ़ा और बोडीगामा' स्थान किसलिए प्रसिद्ध हैं? Librarian 2022 ग्रामसेवक 2016 जाजम प्रिंटिंग के लिए तामचीनी के लिए तीर बनाने के लिए कुंदन कला के लिए चंदूजी का गढ़ा (बांसवाड़ा) व बोडीगामा (डूंगरपुर) लकड़ी के तीर-कमान के लिए प्रसिद्ध है। 9 / 30 कठपुतलियों का निर्माण मुख्य रूप से कहाँ होता है? Asst. एग्रीकल्चर ऑफीसर 2013 उदयपुर जोधपुर फलौदी दौसा कठपुतली निर्माण के लिए उदयपुर प्रसिद्ध है। अन्य स्थान - बस्सी (चित्तौड़गढ़), जयपुर। 10 / 30 राजस्थान में मूर्तिकला के लिए कौनसा शहर विख्यात है? LDC 2011 अजमेर कोटा भीलवाड़ा जयपुर राजस्थान में मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध स्थान- संगमरमर की मूर्तियाँ - जयपुर, किशोरीग्राम (अलवर); लाल पत्थर की मूर्तियाँ - थानागाजी (अलवर); काले संगमरमर की मूर्तियाँ - तलवाड़ा (बाँसवाड़ा); भवनों में लगने वाले जाली-झरोखे व मूर्तियाँ - सिकन्दरा (दौसा); जिंक की मूर्तियाँ - जोधपुर; चंदन की मूर्तियाँ - चूरू; सोप स्टोन की मूर्तियाँ - गलियाकोट (डूंगरपुर)। 11 / 30 राजस्थान के किस स्थान पर बड़े और बोल्ड डिजाइन और पैटर्न मुद्रित किए जाते हैं? स्टेनोग्राफर 2024 बाड़मेर चूरू जयपुर जोधपुर 12 / 30 मांगीलाल मिस्त्री का संबंध किस कला से है? CET (10+2) 2024 रावणहत्था शहनाई कावड़ पुंगी 13 / 30 संगमरमर की मूर्तियाँ राजस्थान में कहाँ बनती हैं? RAS/RTS 2003 जयपुर किशनगढ़ बांसवाड़ा उदयपुर संगमरमर की मूर्तियाँ बनाने का काम मुख्यतः जयपुर में किया जाता है। जयपुर में सिलावट ब्राह्मण संगमरमर की देवी-देवताओं व महापुरुषों की मूर्तियाँ बनाने के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। जयपुर के अतिरिक्त अलवर के किशोरी ग्राम में भी संगमरमर की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं। 14 / 30 राजस्थान की प्रसिद्ध लोक कला 'बेवाण' है- बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक 2022 खादी के कपड़े पर लोक देवता के जीवन को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करना लकड़ी से निर्मित सिंहासन जिस पर ठाकुरजी की मूर्ति को शृंगारित करके बैठाया जाता है लकड़ी से निर्मित तलवारनुमा आकृति जिसका उपयोग रामलीला नाटक में किया जाता है कपाटों युक्त लकड़ी से निर्मित मंदिरनुमा आकृति 15 / 30 कोफ्तगिरी, राजस्थान का पारंपरिक शिल्प, एक प्रकार की सजावट है जिसकी उत्पत्ति भारत में --------- के साथ हुई है? पुलिस परीक्षा 2022 गुप्तों मराठों मुगलों सिंधियाओं फौलाद/लोहे/स्टील की बनी वस्तुओं पर सोने के पतले तारों से जड़ाई का काम कोफ्तगिरी कहलाता है। कोफ्तगिरी का कार्य उदयपुर, जयपुर व अलवर का प्रसिद्ध है। यह कला दमिश्क से लाई गई। 16 / 30 कावड़ बनाने के लिए कौन प्रसिद्ध है? वन रक्षक 2022 उस्ताद लालचन्द मांगीलाल मिस्त्री साहिबराम चम्पालाल 17 / 30 राजस्थान में कोफ्तगिरी के काम के लिए कौनसे शहर प्रसिद्ध हैं? संगणक परीक्षा 2018 कोटा व बूँदी अलवर एवं जयपुर झालरापाटन व बाराँ बीकानेर एवं जोधपुर 18 / 30 किस लोककला के निर्माण का पुश्तैनी व्यवसाय केवल चित्तौड़गढ़ जिले के ग्राम बस्सी में ही देखा जाता है? कनिष्ठ अनुदेशक 2022 फड़ सांझी व्हील कावड़ कावड़ मंदिरनुमा एक काष्ठ कलाकृति होती है जिसमें अनेक दरवाजे होते हैं। सभी दरवाजों पर चित्र अंकित होते हैं। कावड़ लाल रंग से रंगी जाती है व उसके ऊपर फिर काले रंग से पौराणिक कथाओं को चित्रित किया जाता है। कावड़ निर्माण के कलाकार- मांगीलाल मिस्त्री व द्वारिका प्रसाद जांगिड़। कावड़ वाचन- कावड़िया भाट। लयबद्ध गीतों और पद्य ढंग से रामायण, महाभारत व श्रीकृष्ण की लीलाओं का वाचन करता है तथा वाचन के साथ-साथ कावड़ के विभिन्न कपाटों को खोलता जाता है। कावड़ बनाने का कार्य बस्सी, चित्तौड़ में खरादी जाति के लोग करते हैं। बस्सी में गणगौर, बेवाण व कावड़, कठपुतली, तोरण व लकड़ी की अन्य कलाकृतियाँ बनती हैं। प्रभात सुथार- बस्सी में काष्ठ कला के जन्मदाता। प्रमुख कलाकार- मांगी लाल सुथार, द्वारिका प्रसाद जांगिड़, सत्यनारायण सुथार। 19 / 30 राजस्थान में सीकर का कौनसा शहर गोटा उद्योग का प्रसिद्ध केन्द्र है? पटवार 2025 CET (स्नातक) 2024 CET (10+2) 2024 महिला पर्यवेक्षक 2024 खण्डेला नीमकाथाना 1 व 2 दोनों इनमें से कोई नहीं 20 / 30 कहानी कहने की वह कौनसी परम्परा है, जो राजस्थान में अभी अस्तित्व में है, जहाँ महाकाव्य महाभारत और रामायण की कहानियों के साथ पुराणों की कहानियों, जाति वंशावली और लोक परम्परा की कहानियों को बताया जाता है? पुलिस कॉन्स्टेबल 2022 कावड़ संवाद कावड़ वाचन संवाद वाचन काव्य संरचना 21 / 30 कावड़ कला में किस सामग्री का प्रयोग नहीं होता है? Asst. Pro. (History) 2024 लकड़ी खनिज रंग खड़ी मिट्टी वसली 22 / 30 कौनसा (हस्तशिल्प - स्थान) सही सुमेलित नहीं है? V.D.O. मुख्य परीक्षा 2022 बंधेज (टाई एंड डाई) - जयपुर मसूरिया साड़ी - कैथून लकड़ी के खिलौने - बस्सी तारकशी का काम - उदयपुर 23 / 30 पारम्परिक कलाकार मांगीलाल मिस्त्री किस क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं? प्रयोगशाला सहायक 2022 कावड़ कठपुतली मांडना फड़ 24 / 30 'भरत', 'सूफ', 'हुरमजी', 'आरी' किससे संबंधित हैं? यांत्रिकी डिप्लोमा 2016 पीतल नक्काशी गलीचा व दरी उद्योग ब्लू पॉटरी कढ़ाई व पेचवर्क रंग-बिरंगे धागों से वस्त्र पर कलात्मक चित्रण करना कढ़ाई या कशीदाकारी कहलाता है। राजस्थान की कशीदाकारी में हाथी, मोर, कमल एवं ऊँट का चित्रांकन किया जाता है। कशीदाकारी के प्रमुख स्थान- जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर व कोटा। राजसीको के प्रशिक्षण केन्द्र- बस्सी (चित्तौड़गढ़), धरियावाद (चित्तौड़गढ़), उमरगाँव (बूँदी)। विभिन्न रंग के कपड़ों के टुकड़े काटकर कपड़ों पर विविध डिजाइनों से सिलना पेचवर्क कहलाता है। शेखावाटी का प्रसिद्ध भरत, सूफ, हुरमजी आदि शब्द कढ़ाई व पेचवर्क से संबंधित हैं। 25 / 30 मोजरी का संबंध किससे है? पुलिस परीक्षा 2022 चित्रकारी कालीन जूते आभूषण जूतियों के प्रकार- पगरखी, कंटारखी, मोजड़ी [जोधपुर के चमड़े की जूतियाँ], लिगतरा, जरदो, बिनोटा/बिंदोला [दूल्हे की जूतियाँ], अदारणी, सलीपट, सलेमशाही [मुगलों के जमाने की तीखी नोक वाली जूतियाँ], डेढ़र [जैसलमेरी], नांगरा [जयपुर], पनौती, सपाटा। बडू [नागौर] में UNDP द्वारा कशीदे वाली जूतियों के लिए परियोजना संचालित है। मोहम्मद खलील- राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित। 26 / 30 _____ फड़ चित्रण के लिए जाना जाता है? वनपाल 2022 शाहपुरा चित्तौड़ नाथद्वारा किशनगढ़ शाहपुरा फड़ चित्रण का प्रमुख केन्द्र है, जहाँ छीपा जाति जोशी गोत्र के लोगों द्वारा फड़ चित्रण का कार्य करते हैं। श्रीलाल जोशी इस शैली के प्रमुख चित्रकार हैं। प्रमुख चित्रकार- श्री लाल जोशी, प्रदीप मुखर्जी, श्रीमती पार्वती जोशी (प्रथम फड़ चितेरी महिला), गोतली देवी आदि। 27 / 30 जो नगर समुच्चय लकड़ी के खिलौने बनाने के लिए प्रसिद्ध है, वह है? PTI Ex. 2018 उदयपुर, सवाईमाधोपुर, जोधपुर उदयपुर, सवाईमाधोपुर, बाड़मेर उदयपुर, सवाईमाधोपुर, जैसलमेर उदयपुर, जयपुर, जोधपुर 28 / 30 लकड़ी के बने देव विमान जिनकी देवझूलनी एकादशी पर झांकी निकाली जाती है, कहलाते हैं- JEN विद्युत-डिप्लोमा 2022 बाजोट बेवाण खांडे चौपड़े 'बेवाण' एक प्रकार का काष्ठ का मंदिर है, जिसे मिनिएचर वुडन टेम्पल भी कहते हैं। (बेवाण लकड़ी से निर्मित सिंहासन जिस पर ठाकुरजी की मूर्ति को शृंगारित करके बैठाया जाता है।) अनन्त चतुर्दशी एवं देवझूलनी ग्यारस पर 'बेवाण' निकालने की परम्परा है। बस्सी [चित्तौड़गढ़] के कारीगर 'बेवाण' बनाने में निपुण हैं। 29 / 30 'मोती भारत' किस जिले में पारंपरिक कढ़ाई का काम है? Librarian 2022 पाली सीकर बूँदी जालौर मोती भारत कढ़ाई जालौर जिले की कला है। यह कला अपने चमकदार मोतियों के लिए जानी जाती है। विभिन्न आकार, रंग और प्रकार के मोतियों का उपयोग करके फूलों, बेलों, पक्षियों और जानवरों की डिजाइन बनाई जाती है। मोती भारत कढ़ाई का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के कपड़ों और वस्तुओं को सजाने में किया जाता है। 30 / 30 फड़ कलाकार 'श्री लाल जोशी' किस जिले से संबंधित हैं? CET (10+2) 2024 भीलवाड़ा चूरू जयपुर सीकर अगर लीडरबोर्ड (रिजल्ट) में आपका नाम चाहते हैं, तो निम्न जानकारी फिल कर सकते हैं। आपका केवल नाम सार्वजनिक होगा, ई-मेल और मोबाइल नंबर गोपनीय रहेगा। आप हर बार एक ही नाम और ईमेल का प्रयोग करें, ताकि हर बार अंक आपके स्कोरबोर्ड में ही काउंट हो। Your score isThe average score is 0% 0%